Saturday 20 August 2011

आम शिकायतें और जन लोकपाल...



आम आदमी की शिकायत, मसलन अगर वह दफ्तर में जाता है और उसका राशन कार्ड नहीं बनवाया जाता है और उससे रिश्वत मांगी जाती है, उसका इंकम टैक्स का रिफण्ड नहीं दिया जाता, गरीब महिला की विधवा पेंशन नहीं दी जाती, उससे रिश्वत मांगी जाती है। ऐसी शिकायतों के ऊपर कार्रवाई करने की पावर लोकपाल के दायरे में आनी चाहिए या नहीं आनी चाहिए? कई लोगों का कहना है कि इस तरह कि शिकायतों को लोकपाल के दायरे में लाया गया तो ऐसी लाखों शिकायतों लोकपाल में आ जायेगी और लोकपाल की पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी। 

हमारा ये मानना है कि ये बाते बिल्कुल गलत हैं क्योंकि हमने जो व्यवस्था लोकपाल कानून के अन्दर की है वो ये है कि पहले उस विभाग का एक अधिकारी काम करेगा अगर वो काम नहीं करता तो वो शिकायत हैड ऑफ द डिपार्टमेण्ट के पास जाएगी। वो भी काम नहीं करता तो लोकपाल के विजिलेंस अफसर के पास ये पावर होगी कि वो इन दोनों अफसरों की तन्ख्वाह काटे और वो आपको मुआवज़े के रूप में दे और इनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दायर करें।

अगर तीन चार मुकदमें भी हैड ऑफ डिपार्टमेण्ट के खिलाफ दायर हो गए तो हमें लगता है कि इनकी जवाबदेही तय होगी, जो आज तक आजादी के बाद इनके एक भी केस में जवाबदेही तय नहीं हुई है। अगर दिन-ब-दिन इनकी जवाबदेही होनी चालू हो गई तो पूरी की पूरी व्यवस्था दुरूस्त हो जायेगी। हमारा तो ये मानना है कि लाखों शिकायतें आने की बजाय शिकायतें आनी बिल्कुल बन्द हो जायेगी, लेकिन मान लीजिए लाखों शिकायते आ भी जाती हैं तब भी पूरी लोकपाल की व्यवस्था नहीं चरमरायेगी। एक डिस्ट्रिक का एक विजिलेंस हो सकता है कि उसके पास लाखों शिकायतें आ जाए तो हमने लोकपाल को ये पावर दी है कि अगर कहीं पर उसे ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत है तो वह ज्यादा कर्मचारियों को तैनात कर सकता है। 4, 5, 6, 10 नये अफसर लगा सकता है ताकि जनता के शिकायतों का जल्दी से निपटारा किया जा सके। 

आज 62 साल की आजादी के बाद भी अगर हम ये कहें की हम लोगों के लाखों शिकायतों का बन्दोवस्त नहीं कर सकते उनका निपटारा नहीं कर सकते तो हमें लगता है कि जनता इस आन्दोलन के साथ नहीं जुड़ेगी। जो लाखों की संख्या में जनता इस आन्दोलन के साथ नहीं जुड़ेगी। जो लाखों की संख्या में जनता इस आन्दोलन मे जुड़ी है वो अपनी समस्याओं के निवारण की उम्मीद को लेकर जुड़ी है। जो दिन पर दिन वो जनता जो जाती है, उनको गालियां सुनने को मिलती है उनसे रिश्वत मांगी जाती है। इसका भी निवारण जन लोकपाल बिल के अन्दर हो। तो हमें ये लगता है कि अगर जनता की लाखों शिकायतें है तो उसके लिए हज़ारों अफसर की नियुक्ति करनी पड़े तो वो सरकार को करनी चाहिए। उसको अब दरकिनार नहीं किया जा सकता। आपको ये बताना होगा क्या जनता की शिकायतों को जन लोकपाल के दायरे में लाया जाए या नहीं लाया जाए।

कुछ लोगों का ये कहना है कि लोकपाल केवल बड़े-बड़े मामलों की जांच करे, 2-जी स्पेक्ट्रम की जांच करे, कॉमनवेल्थ खेलों की जांच करे, वह आम आदमी की राशन पानी की बात न करे, वह पंचायतों हो रहे भ्रष्टाचार की बात न करे, आप के घर के सामने की सड़क में हो रहे भ्रष्टाचार की बात न करे। आप क्या चाहते हैं? क्या आप ऐसा लोकपाल चाहते हैं? क्या आप ऐसा लोकपाल चाहते है? या आप ऐसा लोकपाल चाहते है जो छोटा भ्रष्टाचार हो या बड़ा भ्रष्टाचार हो हर तरह की भ्रष्टाचार की बात करे। उनका लोगों का ये कहना है कि अगर हर तरह के भ्रष्टाचार की बात लोकपाल करेगा तो इसकी व्यवस्था चरमरा जायेगी, हमें ऐसा नहीं लगता। हमने इसके बारे में कैल्कुलेशन किए हैं और हमारा ये मानना है कि अगर शुरू में ज्यादा अपफसरों की जरूरत पड़े तो ज्यादा अपफसरों को लोकपाल में तैनात करके भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त सज़ा दी जाए। दो-तीन साल में आप यह देखेंगे कि भ्रष्टाचार में कमी आयेगी। और उसके बाद आपको कम लोगों की जरूरत पड़ेगी जन लोकपाल के अन्दर। भ्रष्टाचार के मामलें कम होने चालू हो जाएगे।

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